Tuesday, July 16, 2013

                    हिंदू सदा राष्ट्रवादी रहा है, राष्ट्रद्रोही नहीं| जो हिंदू नहीं वह राष्ट्रवादी भी नहीं हो सकता| हिंदू कोई संप्रदाय विशेष नहीं है, एक जीवन शैली है जो संपूर्ण भारतीय प्रायः द्वीप मे फैली हुई है| वह हर व्यक्ति जो हिन्दुस्तान मे रहता है हिंदू है, उसी प्रकार जैसे इटली का नागरिक इतेलियन होता है| दरअसल हमारे संविधान निर्माता दिमागी रूप से इतने परिपक्व नहीं थे कि एसा संविधान बनाते जो यहाँ की सभ्यता और संस्कृति और यहाँ के निवासियों को ध्यान मे रख कर बनाया गया हो बल्कि दूसरे देशों के संविधानो से उधार लेकर या यों कहिए चुरा कर लिया गया था जो कि हमारे देश के लिए घातक थे| इस संविधान को आज के परिपेक्छ मे नये तरीके से लिखने की आवश्यकता है| १९४७ से पहले राष्ट्रवादी होना अपराध माना जाता था और १९४७ के बाद भी इसे कॉंग्रेसी लोग अपराध कहते हैं, क्यों? उन लोगों को स्पष्ट करना चाहिए कि हिंदू राष्ट्रवाद उनके लिए क्या है|