Tuesday, June 13, 2017

          किसान आंदोलन का सच 
         होता यह है कि छोटे किसानो कि आड़ लेकर नेता और बड़े किसान फायदा उठाते है | इस आड़ में बीज और मशीन बेचने वाले व्यापारी फर्जी रशीद बनाकर बैंक के भ्र्ष्ट कर्मचारियों के साथ मिलकर सरकार को धोखा देते हैं | छोटे किसान को थोड़ा हिस्सा देकर सब हड़प का जाते हैं | किसान उसे गैर कृषि कार्यों में खर्च करके कर्जदार हो जाता है | इस तरह से कर्जमाफी कि आड़ में धंधा फलता फूलता है |  
  किसानो को आत्महत्या नहीं करनी पड़े और उसका परिवार भूखा भी न मरे इसकेलिए एक प्लान है | 
१. जो भूमि किसान के लिए भूखमरी और और आत्महत्या का कारण बने उसे सरकार अपने कब्जे में लेले 
    और  उसे नौकरी देदे | 
२. कर्ज के खर्चे का नकद भुगतान की बजाय किसान को कृषि के लिए दिए गए कर्ज की सरकारी विभाग द्वारा 
    मॉनिटरिंग की जाय और उसका ब्योरा रखकर समीक्षा करे |
३. किराये पर लाये गए आंदोलनकारियों के साथ कठोरता से निपटे |
४. ऐसे नेताओं को कठोरता से दण्डित करे जो भड़काते है |
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५ किस्सनो के साथ नियमित बातचीत के द्वारा उनकी समस्या को सुने और समय समय पर निराकरण करे |

६. यदि छोटे व्यापारी और मजदूर कर्मी भी ऐसी मांग उठाने लगे तो अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी और विकास        अवरुद्ध हो जायेगा |